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Sunday, January 10, 2016

वजन कम करना हैं ?


* नास्ता के साथ चा,दूध बंध करे .....
* खाने के समय बाते ना करें ...
* खाने के बाद पानी ,छास ना पियें ..दो घंटे के बाद ले....
* WEEK में एक बार मग/मग के पानी के साथ उपवास करें..
* सब खाने की छुट,लकिन २०% पेट खाली रखो...
* अपने वजन के चिंता मत करो अपने आप कम होगा...
* अपने आप BALANCE होगा.....

Saturday, December 27, 2014

अम्लता (ACIDITY) के लिए आसान

   अम्लता (ACIDITY) सभी रोगियों की तुलना में आज करीब आधे से अधिक रोगो में देखा जाता है। वर्तमान में इस हालत का जिम्मेदार तनाव देखा जाता है, जो प्रमुख कारणों में से एक है। 

*   यहाँ अम्लता(ACIDITY) रोग में आप के लिए मदद कर सकते हैं जो योग के कुछ सुझाव हैं। नियमित प्राणायाम और ध्यान करे। 

वज्रासन(VAJRASAN)


विधिः 
१.      दोनों पैरों को मोड़कर नितम्ब के निचे इस प्रकार रखें  एड़ियाँ बहार की ओर निकली हुई तथा पंजे नितम्ब से लगे हुए हो।
२.      इस स्थिति में पैरों के अंगूठे एक दूसरे से लगे हुए होंगें। कमर,ग्रीवा एवं सिर सीधे रहें। घुटने मिले हुए हों। हाथों को घुटनों पर रखें।




लाभ:
      भोजन के करने के बाद किया जानेवाला यह एक मात्र आसन है। यह आसन करने से अपचन ,अम्लपित्त,गैस,कब्ज के लिए लाभकारी है। भोजन के बाद ५ से १५ मिनिट तक करने से भोजन का पाचन ठीक से होता है। ये आसन  घुटनो की पीड़ा में लाभदाई है। 



पवन मुक्तासन (Pawanmukta asan)

विधि:
१.      सीधे लेट कर दाये  पैर के घुटने को छाती पर रखे।
२.      दोनों हाथो को,अंगुलियों एक दूसरे में सड़ते हुए घुटने पर रखे ,श्वास बाहर निकलते हुए घुटने को दबाकर छाती से लगाये एवं सर को उठाते हुए घुटने से नासिका स्पर्श करे,करीब १० से ३० सेकंड तक श्वास को बाहर रोकते हुए इस स्थिति में रहकर फिर पैर को सीधा कर दे।


                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                      

       

  ३.       इसी तराह दूसरे पैर से करे। फिर दोनों पैरो से एक साथ करे। इस प्रकार ३ से ५ बरी करे। 
४.      दोनों पैरो को पकड़ के शरीर को आगे-पीछे-दये-बाये लुढ़काए।




लाभ:  

१.     ये आसन वायुविकार ,स्त्री रोग अल्पावर्त,कष्टार्त्तव एवं गर्भाशय सम्बन्धी रोगो के लिए लाभदायी है। 
    २.     मोटापा,अम्लपित्त,हदयरोग,गठिया एवं कटी पीड़ा में लाभदायी है।



वीडियो देखे:









Saturday, November 15, 2014

सर्वांगासन

सर्वांगासन(Sarvanga asan)
विधि :
१.  पीठ के बल सीधा लेट जाये।  पैर जोड़ के रखे,हाथो को दोनों और बगल में सटाकर हथेलियाँ जमीं की ओर करके रखे. 

२. स्वास अंदर भरकर पैरो को धीरे धीरे ३० डिग्री , फिर ६० डिग्री  और अंत में ९० डिग्री  तक उठाए।पैरो को उठाते समय हाथो का सहारा ले। यदि  पैर सीधा न हो तो हाथो को उठाकर  कमर के पीछे रखे। पैरो को सीधा मिलाकर रखे और कोहनियाँ भूमि पर टिकी हुए रखे। आँखे बंद एवं पंजे ऊपर तने हुए रखे। धीरे -धीरे ये आसान २ मिनिट से शरू करके आधे घंटे तक करने कोशिश करे। 


३. वापस आते समय जिस क्रम से उठे थे उसी क्रम से धीरे धीरे वापस आये। जितने समय तक सर्वांगासन किया जाये उतने ही समय शवाशन में विश्राम करे।  


लाभ :
१.  मोटापा ,दुर्बलता,कदवृद्धि में लाभ मिलते है ,एवं थकान आदि विकार       दूर होते है। 
२. इस आसन से थाइरोड को सक्रीय एवं पिच्युरेटी ग्लैड के क्रियाशील होने    से यह कद वृद्धि में उपयोगी है।