द्विचक्रिकासन(DVICHKRIKASAN)
विधिः
१. पीठ के बल लेट कर हाथों के पंजे नितम्ब के निचे रख, श्वास रोककर एक पैर को पूरा ऊपर उठाकर घुटने से मोड़कर एड़ी नितम्ब के पास होकर गोलाकार(साइकल चलाने की तरह)घुमाते रहें। इसी तरह इस आसान को १० से बढाकर यथा शक्ति करे।
२. इसी प्रकार दूसरे पैर से इस क्रिया को करें। पैरों को जमीन में टिकाये घुमाते रहें। गोलाकार आकृति बनायें। इसी तरह इस आसान को १० से बढाकर यथा शक्ति करे। थक जाने पर विश्राम करें।
३. इसी अभ्यास को अगली स्थिति में दोनों पैरों को निरंतर साइकिल की तरह चलायें। श्वास भरकर एक पैर घुटने से मोड़कर सीने की तरफ ,दूसरा सीधा फैलायें,भूमि के निकट तक लम्बा फैलाये। श्वास भर इस प्रकार पैर चलायें जैसे साईकिल पर बैठकर चलाते है। फिर विपरीत दिशा में इसी प्रकार दोनों पैरों को निरंतर एक साथ साईकिल की तरह चलायें। इसी तरह ५-१० या यथाशक्ति करें।
लाभ:
मोटापा घटने के लिए यह सर्वोत्तम अभ्यास है। यदि नियमित ५-१० मिनिट तक इसका अभ्यास करने से बढे हुए
