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Saturday, May 16, 2015

वृक्षासन (Vrukshasan)

विधिः 
१.      खड़े होकर दोनों हाथों को सामने भूमि पर लगभग ६ इंच की दुरी बनाकर टिकाइये। 
२.      शरीर का भार हाथों पे लेते हुए धीरे धीरे पैरो को भूमि से उठाकर आकाश में वृक्षवृत स्थिर कर दीजिए। 



लाभ:
      यह आसन शरीर में बल और वीर्य की वृद्धि करता है। नेत्र विकारो एवं कफ विकारों को दूर करता है। हदय एवं फेफड़ो में पर्याप्त मात्रा में रक्त पहुंचा कर उनको स्वस्थ बनाता है।                    

Monday, November 17, 2014

नौकासन (Naukasana)

नौकासन(Naukasana) 

विधि:
१.      दोनों हाथों से ऊपर रखकर सीधे लेट जाये। अब श्वास अंदर भरते हुए पहले सिर एवं कंधो को ऊपर उठाये फिर पैरो को भी ऊपर उठाये। हाथ,पैर एवं सिर समांतर नाव  की तरह उठे हुए रखे। 
२.      इस स्तिथि मे कुछ समय रूककर धीरे-धीरे हाथ-पैर एवं सिर को भूमि पर श्वास बाहर निकालते हुए ले आए। इस प्रकार ३ से ६ बार तक आवृत्ती कर सकते है। 


 


लाभ:
१.      यह आसन आंतो के लाभदायी है एवं कब्ज,गैस,मोटापा आदि को दूर करता है।  
२.     हृदय एवं फेफड़े भी प्राण वायु के प्रवेश से सबल बनते है। 
३.     आंत्र,आमाशय,अग्नाशय एवं यकृत आदि के लिये उत्तम है।  



वीडियो देखे :