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Sunday, December 28, 2014

यौन समस्या के लिए योग(Yoga For Sexual)


        पुरुषो ओर महिलाओं दोनों में कामेच्छा में कमी,तनाव और चिंता, स्तंभन दोष और पुरूषों में शीघ्रपतन की किसी भी तरह-तरह की यौन समस्याओं से संभोग करने में कठिनाई का सामना करना पड़ता है। जहा महिलाओ में कुछ संकीर्ण योन से पीड़ित हो सकता है। 

     
      योग, पुरुषों और महिलाओं दोनों में उचित यौन प्रदशन को बनाए रखने के लिए बहुत उपयोगी हे  और कामेच्छा बढ़ाने के लिए उचित श्रेणी शक्ति देता है। 
     आमतौर पर मनोवैज्ञानिक  संबंधित समस्याओ को अच्छी तरह से योग और प्राणायाम से दूर किया जा सकती है। 
      यह सभी योग-प्राणायाम नियमित रूप से किया जा सकता है।

  धनुरासन,सर्वांगासन,हलासन ,सुर्यनमष्कार ये सभी उपयोगी आसन है उसके साथ प्राणायाम जैसे अनोलोम-विलोम ,भ्रामणिप्राणायाम ,मुला बन्दास उपयोगी है। 
     यह सभी योग-प्राणायाम नियमित रूप से किया जा सकता है। 

धनुरासन (Dhanurasan)

विधिः 
१.     पेट के बल लेट जाइए। घुटनों से पैरों को मोड़ कर एड़ियां नितम्ब के ऊपर रखें। घुटने एवं पंजे आपस में मिले हुए हों। 
२.     दोनों हाथों से पैरों के पास से पकड़िये। 
३.     श्वास को अन्दर भरकर  घुटनों एवं जंघावो को एक के बाद एक उठाते हुये ऊपर की ऑर तने , हाथ सीधे रहें। पिछले हिस्से को उठाने  के बाद पेट के ऊपरी भाग छाती,ग्रीवा एवं सर को भी ऊपर उठाइए। नाभि एवं पेट के आसपास का भाग भूमि पर ही टिके रहे। शेष भाग ऊपर उठा होना चाहिए। शरीर की आकृति धनुष के समान हो जाएगी। इस स्थिति में १० से २५ सेकंड तक रहें। 
४.     श्वास छोड़ते हुए क्रमशः पूर्व स्थिति में आ जाइए। श्वास-पश्वास के सामान्य होने पर ३ - ४  बार करे।   


लाभ: 
नाभि का टलना दूर होता है। स्त्रियों की मासिक धर्म(menstrual) सम्बन्धी रोग में लाभ मिलता है।कमरदर्द,सर्वाइकल(Cervical), स्पोंडोलाइटिस,स्लिपडिस्क(SLEEPDISC) समस्त मेरुदण्ड(Spine) के रोगो में ये आसन लाभकारी है। 

हलासन(Halasan) 

विधि:

१.     पीठ के बल लेट जायें,अब श्वास अंदर भरते हुए धीरे से पैरो को उठाये। पहले ३०,६० डिग्री फिर ९० डिग्री तक उठाने के बाद पैरो को सीर के पीछे की और पीठ को भी ऊपर उठाते हुए श्वास को बहार निकालते हुए ले जाये। 

२.     पैरो को सर के पीछे भूमि पर टिका दें। प्रारम्भ में हाथो को कमर के पीछे लगा दे। पूरी स्थिति में हाथ भूमि पर ही रखे,इस स्थिति में ३० सेकंड रखे। 


३.     वापस जिस क्रम से ऊपर आए थे उसी क्रम से भूमि को हथेलियों को दबाते हुए पैरो को घुटनो से सीधा रखते हुए भूमि प्रर रखे। 

 

लाभ :

१.     थाइराइड ग्रंथि को चुस्त और मोटापा,दुर्बलता आदि को दूर करता है।
२.    मेरुदण्ड को स्वस्थ,लचीला बना कर पृष्ठ भाग की मास  पेशियों को निरोगी बनता है।
३.   गैस, कब्ज,डायबिटीस,यकृत-वृद्धि एवं हदय रोग में लाभकारी है।

सावधानियाँ :

   उच्च रक्तचाप,स्लिपडिस्क,सर्वाइकल, टी.बि. आदि मेरुदण्ड के रोगी इस आसान को ना करे।  


सर्वांगासन(Sarvangasan)

विधि :


१.  पीठ के बल सीधा लेट जाये।  पैर जोड़ के रखे,हाथो को दोनों और बगल में सटाकर हथेलियाँ जमीं की ओर करके रखे.

२. स्वास अंदर भरकर पैरो को धीरे धीरे ३० डिग्री , फिर ६० डिग्री  और अंत में ९० डिग्री  तक उठाए।पैरो को उठाते समय हाथो का सहारा ले। यदि  पैर सीधा न हो तो हाथो को उठाकर  कमर के पीछे रखे। पैरो को सीधा मिलाकर रखे और कोहनियाँ भूमि पर टिकी हुए रखे। आँखे बंद एवं पंजे ऊपर तने हुए रखे। धीरे -धीरे ये आसान २ मिनिट से शरू करके आधे घंटे तक करने कोशिश करे।

३. वापस आते समय जिस क्रम से उठे थे उसी क्रम से धीरे धीरे वापस आये। जितने समय तक सर्वांगासन किया जाये उतने ही समय शवाशन में विश्राम करे।


लाभ :

१.  मोटापा ,दुर्बलता,कदवृद्धि में लाभ मिलते है ,एवं थकान आदि विकार       दूर होते है।
२. इस आसन से थाइरोड को सक्रीय एवं पिच्युरेटी ग्लैड के क्रियाशील होने    से यह कद वृद्धि में उपयोगी है। 

Tuesday, November 18, 2014

प्राणायाम के लाभ एवं महत्व


प्राणायाम के लाभ एवं महत्व (Benefit of pranayam)

      हमारे शरीर में जितनेही चेष्टाएँ होती है उन सभी का प्राण से प्रत्यक्ष सम्बन्ध है। प्रणायाम से इन्द्रियों एवं मन के दोष्  दूर होते है। 
      आसन  से योगी को रजोगुण,प्राणयाम से पापनिवृति और पत्याहार से मानसिक विकार दूर रहते है। स्थूल रूप से प्राणायाम श्वास-प्रश्वास के व्यायाम की एक पद्धति है,जिस से फेफड़े मजबूत ,दीर्घ आयु का लाभ मिलता है। विभिन रोगो का निवारण प्राण-वायु का प्राणायाम द्वारा नियमन करने से सहजतापूर्वक किया जा सकता है। प्राणायाम द्वारा उद्वेग,चिंता,क्रोध,निराशा ,भय और कामुकता आदि मनोविकार का समाधान सरलतापूर्वक किया जा सकता है। प्राणायाम से मसितष्क  की क्षमता बढाकर स्मरण-शक्ति,सुझबूझ,कुशग्रता ,दूरदर्शिता,धारणा ,मेघा आदि मानसिक विशेषताओ प्राप्त किया जा सकता है। 
      भगवान की और से हमें जो जीवन मिला है ;उसमे प्राण श्वास गिनकर मिलते है। जिसके जैसे कर्म होते है उसी के अनुसार उसको अगला जन्म मिलता है। प्राणायाम करने वाला अपने श्वासो का काम प्रयोग करता है,इसलिए वह दीर्घायु भी होता है।  वैसे भी इस सुष्ट्री में जो प्राणी जितने कम श्वास लेते है उतने ही दीर्घजीवी भी होते है। 


प्राणायाम को प्रतिदिन अभ्यास करने से व्यक्ति को जो मुख़्य लाभ होते है ,इस प्रकार से है।

१.      हदय,फेफड़े व् मसितष्क सम्बन्धी रोग दूर होते है। 
२.     मोटापा,कोलेस्ट्रोल ,मधुमेह,कब्ज,गैस,श्वास रोग,एलर्जी,माइग्रेन,रक्तचाप,किडनी के रोग,पुरुष व्  स्त्रियों के समस्त यौन रोग आदि सामान्य रोगों से लेकर सभी साध्य-असाध्य रोग दूर होते है। 

३.      मन अत्यंत स्थिर,शान्त व् प्रशन्न तथा उत्साहित तथा डिप्रेशन आदि रोगो से लाभ मिलता है।    
4.      वात,पित्त व् कफ में लाभ दाई है। 
५.     वंशानुगत सायबिटीज,हदयरोग से बचा सकता है। 
६.      पाचनतंत्र स्वस्थ हो जाता है और उदर रोग दूर हो जाते है। 
७.     समस्त रोग काम,क्रोध,लोभ,मोह व् अहंकार दोष नष्ट हो जाते है। 
८.      बालों का जड़ना,सफ़ेद होना,चारे पैर झुरिया पड़ना आदि से बच सकता है। 
९.      बुढ़ापा देर से आएगा तथा आयु बढ़ेगी। 
१०.     प्राणायाम का अभ्यास करनेवाले व्यक्ति सदा सकारत्मक विचार,चिंतन व् उत्साह से भरा हुवा  रहता है।