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Saturday, November 29, 2014

कपालभाति प्राणायाम(Kapalbhati)



      कपाल अर्थात मश्तिष्क और भाति  का अर्थ होता है दीप्ती,आभा,तेज,प्रकाश आदि। कपालभाति में मात्र रेचक अर्थात श्वास को शक्ति पूर्वक बाहर छोड़ने में ही पूरा ध्यान दिया जाता है। श्वास को भरने के लिए प्रयत्न नहीं करते;अपितु सहजरूप से जितना श्वास अन्दर चला जाता है,जाने देते है,पूरी एकाग्रता श्वास को बाहर छोड़ने में ही होती है ऐसा करते हुए स्वाभाविक रूप से पेट में भि अकुंशन  व् प्रशारण की क्रिया होती है। इस प्राणायाम को ५ मिनिट तक अवश्य ही करना चाहिए। 
      कपालभाति प्राणायाम को करते समय मन में ऐसा विचार करना चाहिए की जैसे ही मैं श्वास को बाहर निकल रहा हूँ, इस पश्वास के साथ मेरे शरीर के समस्त रोग बाहर निकल रहे है। 
      तीन मिनिट से प्रारम्भ करके पांच मिनिट तक इस प्राणायाम का अभ्यास करना चाहिए। प्रणायाम करते समय जब-जब थकान अनुभव हो तब-तब बीच में विश्राम कर ले। प्रारम्भ में पेट या कमर में दर्द हो सकता है। वो धीरे धीरे अपने आप मिट जायेगा। 
लाभ:
१.      मष्तिष्क पर तेज,आभा व् सौन्दर्य बढ़ता है। 
२.      हदय,फेफड़ो एवं समस्त कफ रोग,दम,श्वास,एलर्जी,साइनस आदि रोग नष्ट होते है। 
३.     मधुमेह,मोटापा, गैस ,कब्ज,किडनी व् प्रोस्ट्रेट से संबधित सभी रोग दूर होते है। 
४.     कब्ज  जैसे रोग इस प्राणायाम से रोज ५ मिनिट तक प्रतिदिन करने से मिट जाते है। मधुमेह  नियमित होता है तथा मोटापा दूर होता है। 
५.     मन स्थिर ,शांत रहता है। जिससे डिप्रेशन आदि रोगो से लाभ मिलता है। 
६.     इस प्राणायाम से यकृत,प्लीहा,आन्त्र ,प्रोस्टेट एवं किडनी का आरोग्य विशेष रूप से बढ़ता है। दुर्बल आंतो का सबल बनाने के लिए यह प्राणायाम लाभदाई है। 

भस्त्रिका प्राणायाम (Bhastrika pranayam)



प्राणायाम की सम्पूर्ण प्रक्रियाए :
      प्रत्येक प्राणायाम का अपना एक विशेष महत्व है,सभी प्राणायामों का वयक्ति प्रतिदिन अभ्यास नहीं कर सकता। इस पूरी प्रक्रिया में लगभद २० मिनिट का समय लगता है। 
 भस्त्रिका प्राणायाम (Bhastrika pranayam)




      ध्यानत्मक आसन में बैठकर दोनों नासिकाओं से श्वास को पूरा अन्दर डायफ्राम  तक भरना एव बाहर पूरी शक्ति के साथ छोड़ना भस्त्रिका प्राणायाम कहते है। प्रणायाम को अपनी शक्ति अनुसार तीन प्रकार से किया जाता है। मंद गति से,मध्यम गति से तथा तीव्र गति से। इस प्राणायम को ३-५ मिनिट तक करना चाहिए। दिव्य संकल्प से साथ किया हुवा प्राणायाम विशेष लाभदाई है। 
सूचन :
     जिनको हदय रोग हो , उन्हें तीव्र गति से ये प्राणायाम नहीं करना चाहिए। इस प्राणायाम के दौरान श्वास को अन्दर भरे तब पैट को नहीं फुलाना चाहिए। ग्रीष्म ऋतु में अल्प मात्रा में करे। इस प्राणायाम को ३ से लेकर ५ मिनिट तक रोज करे। 
     प्राणायाम की क्रियाओ को करते समय आँखों को बन्द रखे और मन में प्रत्येक श्वास-पश्वास के साथ ओ३म का मानसिक रूप से चिन्तन व् मनन करना चाहिये। 
लाभ :
१.      सर्दी-जुकाम ,एलर्जी,श्वास रोग,दमा,पुराना नजला,साइनस आदि समस्त कफ रोग दूर होते है। 
२.      थाइरोड व् टान्सिल आदि गले के समस्त रोग रोग दूर होता है। 

३.      प्राण व् मन स्थिर होता है।